पीर सबल सिंह बावरी: दर्शन सिद्धि साधना और सागरनाथ जी का अनुभव

प्रस्तावना

Mythologynath.com के इस मंच पर आज सागरनाथ जी हमारे साथ हैं, जो आज पीर सबल सिंह बावरी की दर्शन सिद्धि साधना के बारे में विस्तार से बताएंगे। यह साधना हरियाणा में विशेष रूप से सफीदो धाम में सबसे अधिक पूजे जाने वाले बड़े पीरों में से एक से जुड़ी है। इस लेख में हम इस साधना की पृष्ठभूमि, कथा, मंत्र, विधि और लाभों को क्रमबद्ध रूप में समझेंगे, जैसा सागरनाथ जी ने बताया।

पीर सबल सिंह बावरी कौन हैं

सागरनाथ जी के अनुसार, पीर सबल सिंह बावरी वे हैं जिन्होंने मुगलों का नाश किया था, जब वे “शामकौर” को बचाने गए थे। युद्ध के दौरान उनकी दोनाली बंदूक की गोलियां समाप्त हो गई थीं। तब वे एक नागे साधु की शरण में गए।

उस समय नागे साधु गुरु ने उन्हें बताया कि सामने एक छपड़ी (छोटा गड्ढा या तालाब) है, जिसमें गारा (मिट्टी-कीचड़) भरा हुआ है। गुरु ने कहा कि उस गारे को भरकर चलाओ, यह गोली के समान कार्य करेगा। जब सबल सिंह ने यह प्रयोग किया और यह सफल हुआ, तो वे उस नागे गुरु के प्रति पूरी तरह श्रद्धावान हो गए और उन्हें अपना गुरु स्वीकार कर लिया, क्योंकि उन्होंने विकट परिस्थिति में इतना बड़ा आशीर्वाद दिया था।

सागरनाथ जी को साधना कैसे मिली

सागरनाथ जी ने बताया कि यह साधना उन्हें हरियाणा के एक अघोरी से प्राप्त हुई थी। उस अघोरी ने अपने सिर पर (सवारी में) लाकर सागरनाथ जी की सबल सिंह बावरी से बातचीत करवाई थी। उस समय जो भी गुप्त बातें बताई गईं, वे सभी शत-प्रतिशत सत्य निकलीं। इसके बाद सागरनाथ जी ने विधिवत इस शक्ति को साधा।

अघोरी ने यह भी बताया था कि यह पीर सागरनाथ जी के कुल देवता के साथ ही चलते हैं और उन्हें इसे सिद्ध करने की सलाह दी।

साधना के लाभ

सागरनाथ जी ने बताया कि इस साधना को सिद्ध करने के बाद साधक की गद्दी घर पर चलने लगती है — जिसका अर्थ है कि जब साधक आसन लगाकर बैठेगा, तो वह लोगों को उनके भूत-भविष्य के बारे में बता सकेगा। उस समय यह शक्ति स्वयं साधक के सिर पर आकर दर्शन देती है और बातचीत भी करती है।

इस साधना से जुड़े अन्य लाभ इस प्रकार बताए गए:

– संसार के सभी प्रकार के कार्य — अच्छे से लेकर बुरे तक — यह शक्ति संपन्न कर सकती है।
– सट्टे के बारे में भी बता सकती है।
– माता श्याम कौर को भी साधक के साथ चला सकती है।
– वशीकरण और मारण जैसे कार्य भी किए जा सकते हैं।
– शत्रु को पागल किया जा सकता है और उसका जड़ से नाश किया जा सकता है।
– धन प्राप्ति के अपार रास्ते खुलते हैं, यानी पैसे का आना-जाना लगातार बना रहता है।

पीर सबल सिंह बावरी का मंत्र (बंगाली पीर मंत्र)

सागरनाथ जी ने बताया कि इस शक्ति को “बंगाली पीर” भी कहा जाता है। मंत्र इस प्रकार है:

“पीर सबल सिंह आया, घोड़े *** रफल दनाली, पीर सबल सिंह हाजिर हो।”

साधना की विधि

सागरनाथ जी द्वारा बताई गई विधि इस प्रकार है:

– दो लड्डू और पांच पत्ते (पान के) अर्पित करने हैं।
– शराब का भोग भी लगाना है।
– गाय के उपले की धूणी (धगना) जलानी है, और उसी के ऊपर भोग अर्पित करना है।
– धीरे-धीरे तेल का दीपक भी जलाना है। जिनके घर में इस पीर की गद्दी पहले से स्थापित है, उन्हें अखंड दीपक जलाना चाहिए। जिनके घर में गद्दी नहीं है, वे साधना के दौरान नियमित रूप से दीपक जला सकते हैं।
– साधना के दौरान 21 माला का जाप करना है।

स्वप्न में दिखने वाला स्वरूप

सागरनाथ जी ने बताया कि जब यह शक्ति साधक के स्वप्न में आना शुरू करती है, तो इनका स्वरूप इस प्रकार होता है:

– ये एक घोड़े पर सवार होकर आते हैं।
– इनके पास दो नाली (बंदूक) बाजू पर लगी होती है और पीछे टांगी (कुल्हाड़ी) होती है।
– ये खाकी वर्दी में प्रकट होते हैं।
– सिर पर पहलवानों जैसी तुर्रेदार पगड़ी होती है।
– इनके पास पुराने समय के अनुसार गोलियों की पेटी (राउंड) भरी हुई होती है, न कि आधुनिक पट्टे वाली।
– हाथ में खाकी रंग का झंडा होता है, जो मैदान फतह करने का प्रतीक है।

सागरनाथ जी ने बताया कि यह शक्ति खुली आंखों से भी दिख सकती है, परंतु यह पूरी तरह साधक की मनोदशा पर निर्भर करता है।

सागरनाथ जी का व्यक्तिगत अनुभव

सागरनाथ जी ने बताया कि जब उन्होंने इस साधना को किया था, तो यह उन्हें सरल विधि से ही सिद्ध हो गई थी। पीर सबल सिंह बावरी ने उन्हें दर्शन दिए और आशीर्वाद दिया। इसके बाद सागरनाथ जी ने उनसे विभिन्न कार्य करवाए, और उन्होंने ठोक-बजाकर वे कार्य पूर्ण भी किए।

भोग-प्रसाद की विशेष सामग्री

सागरनाथ जी ने बताया कि यह एक उग्र साधना है, क्योंकि यह एक तामसी देवता हैं जो तेजी से प्रकट होते हैं। इसके साथ हुक्के का भी भोग चलता है — जिनके घर पर हुक्का चलता है, वे इन्हें हुक्के का भोग दे सकते हैं। ये सिगरेट भी प्रसन्न होकर स्वीकार करते हैं और हुक्का भी।

पीर सबल सिंह बावरी का उच्च दर्जा

सागरनाथ जी ने बताया कि इस पीर का दर्जा पांच पीरों से भी ऊंचा माना जाता है। इस साधना को सिद्ध करने के बाद इनके साथ रहने वाले “अस्तबली” (सहायक शक्तियां) भी साधक की सहायता करने लगते हैं, तथा सबल सिंह बावरी के जो भाई-तुल्य साथी शक्ति हैं, वे भी साधक के सहायक बन जाते हैं।

धूणी लगाकर, ऊपर से प्रसाद अर्पित करके, और कार्य बताकर यह शक्ति गोली की भांति तुरंत कार्य करती है।

शक्ति की विशेष क्षमताएं

सागरनाथ जी ने बताया कि यह शक्ति उन “मसानों” को भी नियंत्रित कर सकती है, जिन्हें अन्य देवी-देवताओं द्वारा भी नियंत्रित नहीं किया जा सकता। यह उन्हें उतार भी सकती है। जिस बाधा को सामान्यतः “पिंड नहीं छोड़ने वाली” कहा जाता है, उसे भी यह शक्ति छुड़वा सकती है।

साधना के दौरान प्रत्यक्ष संवाद

इस चर्चा के दौरान सागरनाथ जी ने बताया कि उस समय पीर सबल सिंह बावरी उनके सामने साक्षात खड़े होकर उनसे बातचीत कर रहे थे, और उन्होंने स्वयं यह विधि सागरनाथ जी को अपने मुख से बताई थी — इसी प्रकार इसे सेट करके चलाने पर कार्य संपन्न होगा, दर्शन भी देंगे और ठोक-छाती बजाकर कार्य भी पूर्ण करेंगे।

चौकी लगाने का महत्व

सागरनाथ जी ने बताया कि यह इस पीर की चौकी लगाने का मंत्र है। जिस घर में इनकी चौकी स्थापित हो जाती है, वहां घर के वारे-न्यारे (कल्याण) हो जाते हैं।

गुरु की देखरेख में साधना करने की सलाह

सागरनाथ जी ने अंत में स्पष्ट चेतावनी दी कि यह साधना हमेशा गुरु की देखरेख में ही करनी चाहिए। यदि साधक के पास गुरु नहीं है, तो वह सागरनाथ जी या रुद्रनाथ जी से संपर्क कर सकता है, जो उन्हें उचित विधि बताकर मार्गदर्शन देंगे।

उन्होंने विशेष रूप से आगाह किया कि बिना गुरु के इस साधना को नहीं करना चाहिए, क्योंकि यदि यह शक्ति साधक के पास आ जाए, तो बिना उचित मार्गदर्शन के उसे संभालना कठिन हो सकता है।

निष्कर्ष

इस चर्चा में सागरनाथ जी ने पीर सबल सिंह बावरी — जो हरियाणा के सफीदो धाम से जुड़े एक अत्यंत सम्मानित और शक्तिशाली पीर हैं — की दर्शन सिद्धि साधना का विस्तृत वर्णन किया। मुगलों के विरुद्ध युद्ध में गोलियां समाप्त होने पर नागे साधु की कृपा से गारे को गोली के समान चलाने की उनकी कथा से यह स्पष्ट होता है कि यह पीर अत्यंत बलशाली और चमत्कारी माने जाते हैं।

इस साधना में लड्डू, पान के पत्ते, शराब, गाय के उपले की धूणी और तेल के दीपक के साथ 21 माला का जाप शामिल है। सिद्ध होने पर यह शक्ति साधक को घोड़े पर सवार, खाकी वर्दीधारी, बंदूकधारी योद्धा के रूप में स्वप्न या साक्षात दर्शन देती है, और साधक के हर कार्य को गोली की भांति तीव्रता से पूर्ण करती है।

सागरनाथ जी ने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि इस उग्र और शक्तिशाली साधना को बिना गुरु दीक्षा के कदापि नहीं करना चाहिए, क्योंकि उचित मार्गदर्शन के अभाव में इस शक्ति को संभालना अत्यंत कठिन हो सकता है। सही विधि और श्रद्धा के साथ की गई यह साधना साधक को धन, सुरक्षा और असीम शक्ति प्रदान करने में सक्षम मानी गई है।

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