अंबिका माता / दुर्गा शाबर साधना: नाथ पंथ की प्रमाणिक विधि और धूना हवन

परिचय

mythologynath.com में आपका एक बार फिर से हार्दिक स्वागत है। मैं हूं गुरु सागरनाथ, और मेरे साथ इस बार भी शिष्य उमेश काकड़े जी जुड़े हैं। नवरात्रि सीरीज में आज हम बात करेंगे अंबिका माता की।

नाथ पंथ में अंबिका माता सबसे पूजनीय देवी मानी जाती हैं। इनका रूप ही दुर्गा और नवदुर्गा का रूप है। सबसे बड़ी बात यह है कि ये सात्विक रूप में रहते हुए भी राजसी कार्य संपन्न करती हैं — गद्दी लगाना, सवारी लेना, कन निकालना, दुनिया का हाल बताना, यह सब कार्य अंबिका माता करती हैं। इतना ही नहीं, जीवन में जो कार्य रुके पड़े होते हैं, वे “योग” बनाकर उन्हें पूरा भी करवा देती हैं।


अंबिका माता को सिद्ध क्यों करें?

आज के समय में घर-घर में दुर्गति देखी जा सकती है। शादी के बाद जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं, शत्रु बढ़ जाते हैं, ग्रहों की बाधाएं भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में “दुर्गा” और “अंबिका” यह नाम ही “दुर्गति” को हरने से पड़ा है। जब माता ने राक्षस का वध किया, तभी से यह नाम प्रचलित हुआ।

अंबिका माता की साधना करने से तीन प्रमुख लाभ होते हैं —

1. *गृहस्थी की रक्षा* — माता अपने साधक के घर-परिवार की पूरी तरह रक्षा करती हैं।
2. *लेवल एनहांसमेंट* — साधक का आत्मिक और सांसारिक स्तर ऊंचा उठाती हैं।
3. *शत्रु-ग्रह-कर्म के दोष रोकना* — माता शत्रुओं से, बुरे ग्रहों से और पूर्वजन्म के कर्मों के दोषों से साधक की रक्षा करती हैं।


धूना/धूने पर साधना विधि

नाथ पंथ में जहां साधना की जाती है, उस स्थान को “धूना” कहा जाता है। इसके लिए जमीन पर एक कुंड बनाया जाता है, जिसमें गाय के कंडे सुलगाए जाते हैं। इसके साथ त्रिशूल, चिमटा और नाथ गद्दी लगाई जाती है।

यंत्र स्थापना: 15 अंक का महत्व

साधना में सबसे पहले भोज पत्र का उपयोग होता है — यह पेड़ की छाल से बना एक अत्यंत पतला पत्ता होता है, नाखून जितना पतला। इस भोज पत्र पर 15 नंबर का यंत्र बनाया जाता है। इस यंत्र में जिधर से भी गिना जाए, हर तरफ का योग 15 आना चाहिए — इसके लिए 3×3 यानी 9 खाने बनाए जाते हैं, साथ में 4 कोने और बीचोंबीच सेंटर मिलाकर कुल 15 अंक की व्यवस्था तैयार की जाती है।

इसके बाद एक चौकी लगाई जाती है — लकड़ी के तख्ते पर लाल, पीला या सफेद कपड़ा बिछाया जाता है। इस बात का विशेष ध्यान रखना है कि यह चौकी सीधे धरती पर नहीं रखी जाती।

कलश स्थापना की विधि

साधना में कलश स्थापना का भी विशेष महत्व है —

– कलश *मिट्टी का* होना चाहिए, कॉपर यानी तांबे का नहीं।
– कलश के अंदर सात प्रकार का अनाज डाला जाता है, साथ में गुड़ की एक डली, 5 कपूर, 5 लौंग और 5 इलायची डाली जाती है।
– कलश के ऊपर एक नारियल रखा जाता है, जिसे मौली (कलावा) से बांधा जाता है। इसमें ध्यान रहे कि आम के पत्ते नहीं लगाए जाते।
– कलश के पास ज्योत जलाई जाती है, जिसमें तेल और घी दोनों का प्रयोग किया जाता है। अगर यह ज्योत खपर (मिट्टी के दीये विशेष) में जलाई जाए, तो यह सबसे उत्तम मानी जाती है।


भोग और हवन

भोग की सामग्री

साधना में माता को अर्पित किए जाने वाले भोग इस प्रकार हैं —

– *सफेद चावल* — उबले हुए रूप में अर्पित किए जाते हैं।
– *गुड़ वाले मीठे चावल* — इन्हें केले के पत्ते पर रखकर अर्पित किया जाता है।
– *पंचमेवा* — इसमें किशमिश या सोगी, गरी या कोपरा, बादाम, अखरोट और खजूर या शवारा शामिल हैं। इसके साथ काजू भी अर्पित किया जा सकता है।

हवन से जुड़े तीन बड़े कार्य

हवन के माध्यम से तीन प्रमुख कार्य सिद्ध किए जा सकते हैं —

*1. घर की शुद्धि*: पंचमेवा के साथ 5 या 11 नींबुओं का हवन करने से घर की समस्याएं दूर हो जाती हैं।

*2. कार्य सिद्धि*: अगर कोई काम रुका हुआ हो, तो 2-3 बार हवन करने से वह रुका हुआ काम बन जाता है।

*3. शत्रु नाश*: शत्रु से मुक्ति के लिए 11 माला जाप करने के बाद 5 नींबुओं को अभिमंत्रित करके श्मशान में गाड़ दिया जाता है या फेंक दिया जाता है। इस प्रक्रिया से शत्रु साधक का पीछा छोड़ देता है।

तंत्र और कोर्ट-कचहरी की समस्याएं तोड़ने की विधि

*4 कील की विधि*: अगर घर पर किसी प्रकार का तंत्र प्रयोग किया गया हो, तो मुख्य द्वार के बाईं और दाईं ओर 2-2 कीलें गाड़ी जाती हैं। इससे तंत्र प्रयोग रुक जाता है।

*शत्रु के नाम की विधि*: शत्रु के नाम से सवा किलो लड्डू, लाल चुनरी, नारियल और 16 श्रृंगार का सामान लेकर उसे जल में विसर्जित किया जाता है। यह प्रक्रिया मंगलवार के दिन 3-4 बार दोहराई जाती है।


प्रमाणिक अंबिका शाबर मंत्र

आज के समय बाजार में इस मंत्र के बहुत से डुप्लीकेट वर्जन मौजूद हैं, लेकिन जो मंत्र यहां दिया जा रहा है, वह 2008 से ट्राइड एंड टेस्टेड है।

० ॐ आठ भुजी अंबिका एक नाम
० ओंकार फट दर्शन
० त्रिभुवन में पांच पंडवा, सात दीप, चार कूट, नौ खंड में
० चंदा सूरज दो प्रमाण
० हाथ जोड़ विनती करूं, मम करो कल्याण

मंत्र के शब्दों का अर्थ

इस मंत्र में कुछ विशेष शब्द आते हैं, जिनका अर्थ इस प्रकार है

– *पांच पंडवा*: इसका अर्थ है पांच तत्वों से बना शरीर (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश)।
– *सात दीप*: सात द्वीपों का प्रतीक।
– *चार कूट*: चार दिशाओं का प्रतीक।
– *नौ खंड*: पृथ्वी के नौ खंडों का प्रतीक।

खास बात यह है कि इस एक ही मंत्र से दुर्गा, अंबिका और नवदुर्गा — तीनों स्वरूप सिद्ध हो जाते हैं।


जाप के नियम

इस साधना को संपन्न करने के लिए कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है —

*माला*: जाप के लिए मूंगे की माला सर्वोत्तम मानी गई है। अगर मूंगे की माला उपलब्ध न हो, तो रुद्राक्ष की माला भी चल सकती है।

*माला की संख्या*: प्रतिदिन कम से कम 11 माला जाप आवश्यक है।

*गले में फूल माला*: साधना के दौरान गले में फूल माला भी पहनी जा सकती है — गेंदा या गुलाब के 5 फूलों की माला भी पर्याप्त है।

*समय*: यह साधना नवरात्रि के 9 दिनों में की जा सकती है। इसके अतिरिक्त इसे 21 दिन या 41 दिन तक भी बढ़ाया जा सकता है। साधना के दौरान सोने के लिए नीचे मैट्रस या चद्दर बिछाकर सोना चाहिए।

*रंग*: वस्त्र और आसन के लिए लाल, पीला या सफेद रंग उपयुक्त है।

*विशेष नोट महिलाओं के लिए*: अगर साधना के दौरान किसी महिला को पीरियड्स आ जाएं, तो वे ब्रेक लेकर बाद में साधना दोबारा शुरू कर सकती हैं। इससे साधना खंडित नहीं मानी जाती।


माता के आने के संकेत

साधना के दौरान योग निद्रा में माता के दर्शन होते हैं। इनका स्वरूप इस प्रकार वर्णित किया गया है —

– *अष्टभुजी रूप* में, बब्बर शेर पर सवार, हाथ में त्रिशूल लिए, लाल वस्त्र धारण किए हुए।
– कभी-कभी *कन्या रूप* में — 4 से 6 वर्ष की आयु की बालिका के रूप में दर्शन देती हैं।
– माता कभी काली रूप में, कभी वैष्णव रूप में और कभी दुर्गा रूप में प्रकट हो सकती हैं।

साधना के दौरान माता की सवारी या चौकी भी लग सकती है — जाप करते ही शरीर भारी होने लगता है, यह इस बात का संकेत है कि माता की शक्ति साधक से जुड़ रही है।

एक विशेष बात यह भी बताई गई है कि इस साधना के माध्यम से मंत्र भी प्राप्त किए जा सकते हैं — साधक को जिस भी देवता के मंत्र की आवश्यकता हो, वह मांग सकता है, और माता स्वयं वह मंत्र दिलवा देती हैं।


इस अवसर पर गुरु सागरनाथ 10 महाविद्याओं की गुप्त शाबर साधना करवा रहे हैं। इस विशेष दीक्षा के लिए सिर्फ 50 सीटें उपलब्ध हैं, और बुकिंग अभी चालू है।


दीक्षा में क्या मिलेगा?

इस दीक्षा के अंतर्गत साधक को मंत्र, पूर्ण विधि, PDF सामग्री और व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। गुरु मंत्र केवल दीक्षा लेने के बाद ही प्रदान किया जाता है।

गुरु सागरनाथ का यह भी कहना है कि जहां अन्य लोग 3-4 अनुष्ठान करने की सलाह देते हैं, वहीं उनके गुरु मंत्र से एक ही अनुष्ठान में माता की कृपा प्राप्त हो जाती है — क्योंकि यह साधना स्वयं गुरुजी द्वारा अनुभव की हुई और प्रमाणित है। जैसा वे कहते हैं — “ऊंची दुकान फीके पकवान” वाली बात यहां लागू नहीं होती।


निष्कर्ष

अंबिका माता की यह साधना नाथ पंथ की एक प्राचीन और प्रमाणिक विधि है, जो दुर्गा और नवदुर्गा के समस्त स्वरूपों को एक साथ जोड़ती है। इस साधना में भोज पत्र पर 15 अंक के यंत्र की स्थापना, मिट्टी के कलश की पूजा, धूना हवन और आठ भुजी अंबिका के शाबर मंत्र का जाप शामिल है।

इस साधना के माध्यम से न केवल गृहस्थी की रक्षा होती है, बल्कि रुके हुए कार्यों में योग बनता है, शत्रुओं का नाश होता है, तंत्र-बाधाओं से मुक्ति मिलती है और धन-समृद्धि तथा विवाह जैसी समस्याएं भी सुलझती हैं। साथ ही, साधक को माता की सवारी, चौकी और स्वप्न के माध्यम से मंत्र-सिद्धि भी प्राप्त हो सकती है।

गुरु सागरनाथ के शब्दों में — “क्यों पड़े हो चक्कर में, कोई नहीं है टक्कर में।” जो लोग नवरात्रि 2026 में इस गुप्त शाबर साधना की दीक्षा लेना चाहते हैं, वे संपर्क कर सकते हैं।

राम राम। जय माता की। जय गुरुदेव।

Ready to elevate your sadhana? Lets connect!