भागो जिननी साधना: जिन्नों और परियों की माता की दिव्य शक्ति
परिचय
mythologynath.com पर आज विषय है *भागो जिननी साधना* — जिन्नों और परियों की माता की साधना। यह साधना अत्यंत विशेष मानी गई है, क्योंकि यदि इसे सिद्ध कर लिया जाए, तो साधक चुटकी बजाकर किसी भी जिन को सिद्ध कर सकता है। यदि किसी को कोई जिन परेशान कर रहा हो, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, तो इस माता का नाम सुनते ही वह जिन भाग जाता है।
इसी प्रकार, जो लोग अपनी मनपसंद परी को प्राप्त करना चाहते हैं और सीधे उसे सिद्ध नहीं कर पा रहे, उनके लिए यह साधना समाधान है — इस माता को पकड़ने पर वह स्वयं ही अपनी संतान (परी) को साधक के पास लाकर देती है।
इस विषय पर विस्तृत चर्चा के लिए एक बार फिर सागरनाथ जी उपस्थित हुए हैं।
साधना का महत्व और आवश्यकता
चर्चा में स्पष्ट किया गया कि जिन व्यक्ति की जिन्नों या परियों में रुचि हो, उसे सबसे पहले इनकी माता की साधना करनी चाहिए। यह पूर्णतः वास्तविक और प्रभावी साधना बताई गई, जिस पर शक्ति बहुत तेज गति से कार्य करती है — जिस भी जिन या परी को साधक चाहेगा, यह माता उसे लाकर दे देती है।
आज के समय में इंटरनेट पर जिन्नों-परियों को सिद्ध करने के शौकीन लोग बहुत हैं, परंतु तन-मन से प्रयास करने पर भी उन्हें सफलता नहीं मिलती। ऐसे लोगों के लिए यह साधना अमृत के समान बताई गई है, जो उनकी मनचाही परी या जिन को खींचकर ले आती है।
इस साधना के लिए केवल इतना आवश्यक है कि साधक को उस जिन या परी का नाम या मंत्र मालूम हो। यह जानकारी किसी ग्रंथ में हो सकती है — विशेष रूप से इस्लामिक अरबिक ग्रंथों, जैसे कुरान में जिन्न या परी के नाम का उल्लेख मिल सकता है। बस नाम लेने भर से, चाहे वह जिन पाताल में हो, स्वर्ग में हो, या धरती के आसमान में विचरण कर रहा हो — यह माता उसे स्वयं खींचकर ले आती है, क्योंकि इनका दर्जा एक मां का दर्जा है, और मां का वचन कभी खाली नहीं जाता।
भागो जिननी की शक्तियां और कार्यक्षमता
यह साधना अत्यंत आज्ञाकारी मानी गई है — साधक जैसे ही चुटकी बजाए, यह सिद्धि प्रदान करने, किसी को नष्ट करने या अटके हुए काम पूरे करने की क्षमता रखती है, क्योंकि इसके साथ पूरी जिन्नों की फौज चलती है। यह भी बताया गया कि मनुष्यों की जनसंख्या से कई गुना अधिक जिन्नों की जनसंख्या धरती पर मौजूद है, परंतु वे दृश्य रूप में हमें दिखाई नहीं देते।
भागो जिननी की प्रमुख शक्तियां इस प्रकार बताई गईं:
– यह साधक के शरीर का बल बढ़ाती है और उसे अनहेस (अत्यंत बलशाली) बना देती है।
– यह वशीकरण और मारण दोनों में माहिर है।
– यह शत्रु नाश करने में सक्षम है।
– यह गड़ा हुआ धन दिखाने में भी सक्षम मानी गई है।
– यह चारों दिशाओं में साधक के कार्यों को रुकने नहीं देती।
भोग की अनिवार्य शर्त
इस साधना में एक महत्वपूर्ण शर्त बताई गई — जब भी इससे कोई कार्य लिया जाए, इसे भोग अर्पित करना अनिवार्य है। यदि भोग न दिया जाए तो यह कार्य करना बंद कर देती है और उल्टा कार्यों में रुकावट भी डाल सकती है। भोग सात्विक और तामसिक दोनों प्रकार का हो सकता है, अर्थात साधक अपनी सुविधा अनुसार कोई भी विधि अपना सकता है।
साधक का व्यक्तिगत अनुभव
सागरनाथ जी ने बताया कि जब उन्होंने स्वयं इस साधना को सिद्ध किया था, तब उन्हें बेहद उच्च स्तर के अनुभव हुए। साधना के दौरान उनके सामने के दरवाजे अपने आप बजने लगे थे, जिससे यह आभास हो रहा था कि कोई शक्ति आ रही है। इसके साथ ही चमेली की तीव्र खुशबू आई, जबकि उन्होंने स्वयं चमेली का कोई इत्र उपयोग नहीं किया था। बाद में उनके गुरुदेव ने बताया कि यह खुशबू इस बात का संकेत है कि साधना के दौरान एक परी आ रही है।
सिद्धि साधना और नाथ पंथ की विधि
सागरनाथ जी ने स्पष्ट किया कि उनकी सभी साधनाएं “सिद्धि साधना” होती हैं, जिसका अर्थ है कि जिस मंत्र को पकड़ा जाए, उसे सिद्ध करके ही छोड़ा जाता है, न कि वे केवल टाइम-पास वाली साधनाएं होती हैं।
उन्होंने बताया कि उन्होंने इस साधना को अपने *धूने* (नाथ पंथ में उपयोग होने वाला अग्निकुंड) पर सिद्ध किया था। उन्होंने साधना को सात सप्ताह में करने का संकल्प लिया था, परंतु एक ही सप्ताह में यह सिद्ध हो गई। इस पर देवी ने स्वयं उन्हें बताया कि वे सिद्ध हो चुकी हैं, हालांकि माला निकालने की प्रक्रिया पूर्ण करने में समय अधिक लगता है।
इसके बाद देवी ने सागरनाथ जी से तामसी रूप में साधना करने की इच्छा प्रकट की। तामसी विधि के लिए आवश्यक सामग्री इतनी सामान्य बताई गई कि कोई भी व्यक्ति मात्र ₹80-100 में इसे खरीद सकता है, फिर भी यह साधना बिजली की तरह, गोली की भांति तीव्र गति से कार्य करती है।
रिश्वतखोरी के मामले में सहायता का अनुभव
एक अनुभव साझा करते हुए बताया गया कि एक बार सुबह-सुबह फोन आया कि किसी का भाई रिश्वतखोरी के मामले में फंस गया है और अधिकारी उसे पकड़ने आए हुए हैं। इस पर सागरनाथ जी ने इस साधना का प्रयोग किया, और एक घंटे के भीतर ही उस व्यक्ति की रिहाई हो गई। जो अधिकारी उसे पकड़ने की पूरी योजना के साथ आए थे, उन्होंने उल्टा उसका प्रमोशन कर दिया। हालांकि इसके साथ यह चेतावनी भी दी गई कि इस प्रकार के गलत कार्यों को दोबारा नहीं दोहराना चाहिए।
तामसी साधना के दौरान जिन्नों की फौज का दृश्य
तामसी साधना के दौरान जिन्नों की एक विशाल फौज दिखाई दी, जिनके विभिन्न रूप बताए गए — कुछ जिन आधे मनुष्य और आधे बकरी या घोड़े के पैरों वाले, कुछ सुनहरे रंग के जिन (जिन्हें नीलवनी भी कहा जाता है), कुछ हाफिज जिन जिनके पंख होते हैं, और कुछ बिना पंखों के ही हवा में उड़ने वाले जिन। इनकी संख्या और प्रकार इतने अधिक हैं कि इनका पूर्ण विवरण देने में कई घंटे लग सकते हैं। इस पर एक अलग एक घंटे की विस्तृत वीडियो पहले से बनाई जा चुकी है।
भागो जिननी का प्रकटन
सातवें दिन जब देवी तामस रूप में प्रकट हुईं, तो उनका आकार लगभग 71-72 फुट का बताया गया। वे अत्यंत सुंदर, नवयौवना के समान, अत्यधिक सोने के आभूषणों और श्रृंगार से सुसज्जित थीं। उनका वस्त्र पंजाबी सूट जैसा था, न कि इस्लामिक बुर्का शैली का।
उन्होंने कहा कि उनके “बच्चे” (जिन) एक ओर हट जाएं, क्योंकि वे नाथ जी के साथ सीधे बात करना चाहती हैं और तामस रूप की विधि तथा वचन देना चाहती हैं। साधक के इशारे पर उन्होंने अपना आकार छोटा करके 60-65 फुट के करीब कर लिया, समीप बैठकर प्रणाम किया और सेवा के लिए पूछा।
वचन
देवी ने वचन दिया कि जब भी साधक बुलाएगा, वे उपस्थित होंगी और जिसे भी भेजा जाएगा, उसका मिसयूज नहीं करेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे हर प्रकार के कार्य कर सकती हैं — अच्छे और बुरे दोनों — परंतु परिणाम इंसान के कर्मों पर निर्भर करता है। यदि साधक अच्छे कार्य करेगा तो उसका जीवन अच्छा रहेगा, और यदि वह बुरे कर्मों की ओर जाएगा तो उसे अपने कर्मों का फल भी भुगतना होगा।
जिन बच्चों की मांग
इस दौरान जिन (देवी के “बच्चे”) साधक से अपना तोशा (उपहार/भेंट) मांगने लगे, जिस पर उन्हें डांटा गया। जिन ने बताया कि वे अपनी मां से डरते हैं, न कि साधक से — क्योंकि यदि उन्होंने साधक से कुछ मांगा तो मां उन्हें दंडित करेगी। इन जिनों की एक और आदत बताई गई कि वे लालच देकर सोने की मुद्राएं देने की बात कहकर वस्तुएं मांगते रहते हैं। इन्हें नियंत्रित रखने के लिए नाथ संप्रदाय में *डंडा या छड़ी* सिद्ध की जाती है, जिससे इनकी सर्विस (दंड) की जाती है।
साधना का मंत्र
चर्चा में मंत्र इस प्रकार बताया गया:
० वाडो मन्ने यारी, *** माई भागो जिननी तेरी काती।
यह एक शाबर मंत्र है, जिसे “बहुत जबरदस्त कलाम” बताया गया है।
साधना की विधि
आवश्यक सामग्री
– पांच लौंग और पांच इलायची
– एक लोटा या गिलास पानी
– इत्र (हिना, गुलाब या चमेली)
– 10 से 11 माला जप — रुद्राक्ष की माला या तस्बी दोनों चल सकती हैं
– तामसिक विधि में एक छोटी कच्ची मछली रखनी होती है
सामग्री प्रतिदिन बदलनी होती है और इसे उजाड़ (एकांत) स्थान पर रखना है। जप के बाद या अगली सुबह इस सामग्री को उजाड़ या किसी पेड़ के नीचे रखकर जल अर्पित किया जाता है, और वापस आते समय पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए।
इत्र का महत्व
बताया गया कि गुलाब के इत्र का प्रयोग करने पर जिन दिखने की संभावना अधिक रहती है, जबकि हिना या चमेली के इत्र का प्रयोग करने पर परियां दिखाई देती हैं।
दिशा और वस्त्र
नाथ संप्रदाय से साधना करने वालों को पूर्व दिशा की ओर मुख करके साधना करनी चाहिए, जबकि मुस्लिम पद्धति अपनाने वालों को पश्चिम दिशा का पालन करना होता है। साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर साधना करनी चाहिए, वस्त्रों के रंग को लेकर कोई विशेष बाध्यता नहीं है।
साधना के दौरान अनुभव
साधना के दौरान रात्रि में उजाड़ स्थान पर अजीब आवाजें आने का अनुभव भी बताया गया — जिन के बच्चों की चीखने-चिल्लाने की आवाजें। कई बार साधक को लालच देकर पीछे मुड़कर बात करने के लिए फुसलाया जाता है, परंतु साधक को बिना पीछे देखे आगे बढ़ते रहना चाहिए। कभी-कभी ऐसा भी अनुभव होता है जैसे कोई पीछे-पीछे चल रहा हो।
अंततः साधना सिद्ध होने पर देवी स्वयं मार्ग में प्रकट हुईं, साधक के सिर पर आशीर्वाद स्वरूप हाथ रखा और अदृश्य हो गईं।
साधना के उपयोग
इस साधना के कई उपयोग बताए गए:
1. *जिन-पकड़ से मुक्ति*: यदि किसी कुंवारी लड़की को जिन ने या किसी कुंवारे लड़के को परी ने पकड़ लिया हो, तो इस मंत्र के जाप से वे उस व्यक्ति को छोड़कर भाग जाते हैं — इसके पास हर समस्या का समाधान है।
2. *जिन से कार्य लेना*: पीड़ित व्यक्ति की सिर की चोटी के बाल पकड़कर मंत्र पढ़ने पर जिन प्रकट होकर अपना नाम बता देता है। इसके बाद उसे वचन में बांधकर कार्य करवाया जा सकता है। एक अन्य तरीका यह भी है कि मंत्र पढ़ते हुए मिट्टी या भस्म फेंककर उस जिन को स्तंभित किया जा सकता है, जिसके बाद उससे वचन लिया जा सकता है।
आवश्यक सुरक्षा उपाय
चर्चा में इस साधना की गंभीरता को लेकर विशेष सुरक्षा उपाय बताए गए:
– साधक के पास *गुरु मंत्र* होना आवश्यक है, और उसे गुरु मंत्र की “चोट” मारनी आनी चाहिए, तभी यह शक्ति नियंत्रण में रहती है।
– *भैरव मंत्र* भी आवश्यक है।
– एक *रक्षा मंत्र* होना चाहिए — जो व्यक्ति आयतुल कुर्सी का पाठ करता है, वह भी रक्षा के लिए उपयुक्त है, अन्यथा नाथ पंथ से जुड़े साधकों को नाथ पंथ का रक्षा मंत्र ही अपनाना चाहिए।
यह स्पष्ट किया गया कि आयतुल कुर्सी स्वयं भागो जिननी (माता) को नियंत्रित नहीं कर सकती — यह मां किसी के वश में नहीं आती। परंतु इसके “बच्चों” (जिन्न फौज) पर आयतुल कुर्सी का प्रभाव पड़ता है और वे नियंत्रण में आ जाते हैं। चूंकि उपद्रव अधिकतर इन्हीं बच्चों (सेना) द्वारा किया जाता है, इसलिए इनकी सेना को नियंत्रित करने के लिए रक्षा मंत्र आवश्यक बताया गया है।
साधना की प्रकृति
यह साधना *नूरी साधना* बताई गई है, न कि काला इल्म। यह पूर्णतः शुद्ध और सफेद (वाइट) साधना मानी गई है, क्योंकि बागो जिननी का दर्जा एक मां का दर्जा है।
चेतावनी: बिना दीक्षा न करें
चर्चा के अंत में यह स्पष्ट चेतावनी दी गई कि इस साधना को बिना गुरु दीक्षा लिए, बिना गुरु मंत्र, बिना गुरु का रक्षा मंत्र, बिना आसन मंत्र और बिना भैरव मंत्र लिए नहीं करना चाहिए। बिना उचित मार्गदर्शन के इसमें उतरने पर साधक भयभीत हो सकता है — देवी के बच्चे (जिन) साधक को उलझन में डाल सकते हैं, और जो कार्य साधक करने चला था, उसका परिणाम कुछ और ही हो सकता है।
निष्कर्ष
भागो जिननी साधना जिन्नों और परियों की माता की एक अत्यंत शक्तिशाली, नूरी (शुद्ध) साधना है, जो साधक को बल, वशीकरण, मारण, शत्रु नाश और गड़ा धन दिखाने जैसी अनेक क्षमताएं प्रदान करती है। इस चर्चा में इसके मंत्र, सात्विक व तामसी दोनों विधियां, आवश्यक सामग्री, तथा साधकों के व्यक्तिगत अनुभव विस्तार से साझा किए गए — जिनमें रिश्वतखोरी के मामले में सहायता से लेकर देवी के विशाल दिव्य स्वरूप के प्रकटन तक की घटनाएं शामिल हैं।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यह साधना जिन-परी से पीड़ित व्यक्तियों को मुक्ति दिलाने और स्वयं जिन से कार्य लेने, दोनों में सक्षम है। परंतु इसकी गंभीरता को देखते हुए गुरु दीक्षा, गुरु मंत्र, भैरव मंत्र और रक्षा मंत्र के बिना इसमें प्रवेश करना खतरनाक बताया गया है। इस प्रकार, यह साधना जितनी शक्तिशाली है, उतनी ही सावधानी और उचित मार्गदर्शन की मांग भी करती है।
