लूना चमारी साधना: नाथ संप्रदाय की प्राचीन रहस्यमई विद्या

परिचय

Mythologynath.com पर आज बात होगी एक अत्यंत प्राचीन और रहस्यमई साधना — लूना चमारी साधना की। इंटरनेट पर लूना चमारी की अनेक साधनाएं उपलब्ध मिल जाती हैं, लेकिन जो असली और मूल (ओरिजिनल) लूना चमारी की साधना है, वह केवल नाथ संप्रदाय में ही मिलती है। यदि कोई इसे पूर्ण रूप से नहीं, बल्कि कहीं और से अधूरी सीखकर करता है तो यह पूर्ण रूप से काम नहीं करती।

यह नाथ संप्रदाय की सिद्ध हनुमान जी की मोहिनी मानी जाती है, अर्थात इस साधना में हनुमान जी स्वयं साधक के साथ चलते हैं और तभी यह गोली की तरह तीव्र गति से काम करती है।

इस विषय पर विस्तार से चर्चा करने के लिए Mythologynath.com पर एक बार फिर सागरनाथ जी उपस्थित हुए, जिन्होंने रुद्रनाथ जी के साथ इस साधना के इतिहास, मंत्र, विधि और अनुभवों को साझा किया।

यह वही अत्यंत शक्तिशाली साधना है जो हनुमान जी की लूना चमारी के रूप में जानी जाती है, जिसे कामाख्या रूप कामरूप देश में पूजा जाता था। उस समय इसे हनुमान जी को सिद्ध कर रखा गया था, और यह विद्या इस्माइल जोगी की शिष्य परंपरा से जुड़ी हुई है।

लूना चमारी के विभिन्न स्वरूप

चर्चा में यह स्पष्ट किया गया कि लूना चमारी कोई एक ही साधना नहीं है, बल्कि इसके कई प्रकार प्रचलित हैं। कुल मिलाकर चार प्रमुख रूप बताए गए हैं:

1. राजस्थान वाली लूना चमारी

यह गोगा जाहरवीर की एक दासी हुआ करती थी। वह जाति से चमारी थीं, परंतु एक माता की तरह गोगा जाहरवीर का पालन-पोषण करती थीं। इसी सेवा भाव के कारण गोगा जाहरवीर ने उन्हें छप्पन कलाओं (56 कलमों) का वरदान दिया था। उनके पुत्र का नाम बज्जू कोतवाल था, जो गोगा जाहरवीर के दरबार में कोतवाल के पद पर कार्यरत थे।

2. पंजाब की दो लूना चमारी

पंजाब में इनके दो रूप मिलते हैं:


सुल्तानपुर वाली: यह एक तांत्रिक राजा की रानी थीं, जो स्वयं भी तंत्र विद्या में निपुण थीं। दुखी होकर उन्होंने कुएं में कूदकर प्राण त्याग दिए थे।

अमृतसर वाली: यह चमार जाति से नहीं थीं। अमृतसर में एक “चमरी” नामक गांव है, वहां की होने के कारण इन्हें लूना चमारी कहा जाता था।

 

3. कामरूप देश की लूना चमारी (हनुमान जी की सिद्ध)

इन सभी में सबसे अधिक तेज-तर्रार, तलवार की धार की तरह तीव्र गति से और गोली की तरह काम करने वाली लूना चमारी वही है जो कामरूप देश की है, जिसे हनुमान जी ने सिद्ध कर रखा था। यही वह देश है जहां मत्स्येंद्रनाथ जोगी गए थे और वहां भटक गए थे, जिसके बाद गोरखनाथ उन्हें ढूंढने वहां गए थे — ऐसी कथा प्रचलित है। इसी कामरूप देश की लूना चमारी को इस साधना में सबसे प्रमाणिक और शक्तिशाली माना गया है।

यह मंत्र कैसे प्राप्त हुआ

सागरनाथ जी बताते हैं कि यह मंत्र उन्हें योग निद्रा में हनुमान जी की कृपा से स्वयं प्राप्त हुआ था। एक दिन उनके गुरु उनके पास आए और कहा कि वे उन्हें एक विशेष नगीना देना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि यह लूना चमारी है, जिसे अपने पास रखने से यह समय के साथ-साथ साधक के कार्य भी करेगी और आने वाले समय की जानकारी भी देगी।

गुरु ने यह भी कहा कि जैसे सागरनाथ जी को यह क्षमता है कि वे यह पहचान लेते हैं कि कोई मंत्र मरा हुआ है या जागृत है, वैसे ही यह लूना चमारी साधना उस कार्य में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी।

रोचक बात यह है कि रुद्रनाथ जी को भी यही मंत्र उनके गुरु ने स्वप्न में आकर दिया था। दोनों साधकों के पास एक ही मंत्र होने से यह सिद्ध होता है कि यह प्रमाणिक और वास्तविक विद्या है, जो एक ही पंथ और परंपरा से जुड़ी हुई है।

शाबर मंत्रों को जगाने की शक्ति

लूना चमारी साधना का सबसे बड़ा कार्य यह है कि जब इसे सिद्ध कर लिया जाता है तो साधक के भीतर शाबर मंत्रों को जगाने की शक्ति जागृत हो जाती है। कोई भी मरा हुआ शाबर मंत्र इसके माध्यम से जगाया जा सकता है।

जब किसी शाबर मंत्र की शक्ति जगानी होती है, तब इसी लूना चमारी का अनुष्ठान किया जाता है, जो उस मंत्र में जान फूंक देती है और वह मंत्र सक्रिय रूप से कार्य करने लगता है। इसके साथ ही यह साधक को यह पहचानने की क्षमता भी देती है कि कौन सा मंत्र शुद्ध और असली है और कौन सा नकली या बनावटी।

बताया गया कि इंटरनेट पर लगभग 90% मंत्र बनावटी चलते हैं। एक उदाहरण के रूप में बताया गया कि एक व्यक्ति ने इंटरनेट से उठाकर बिना जाने-समझे लूना चमारी का मंत्र जपना शुरू कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उसके घर में नेगेटिविटी आने लगी और अचानक बहुत सारी चींटियां आने लगीं। बाद में जब यह स्पष्ट हुआ कि उस मंत्र में कोई वास्तविक शक्ति (जान) नहीं थी, तब इसका समाधान किया गया। इससे यह सीख मिलती है कि गलत या अशुद्ध मंत्र पकड़ने से घर और शरीर दोनों पर नकारात्मक प्रभाव (साइड इफेक्ट) पड़ सकते हैं।

पतंग वाला अनुभव

चर्चा के दौरान एक व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किया गया। सागरनाथ जी के एक गुरु भाई थे, जिन्हें कभी पतंग उड़ाने का शौक नहीं था और न ही उन्हें पतंग उड़ाने की कोई तकनीक (कन्नी बांधना, डोर पकड़ना आदि) आती थी।

एक दिन उनके मन में पतंग उड़ाने की इच्छा जागी, परंतु चूंकि उन्हें पतंग उड़ानी नहीं आती थी, इसलिए उन्होंने लूना चमारी का प्रयोग किया। इसके बाद जितनी भी पतंगें आसपास थीं, वे सब कटने लगीं। लोग हैरान होकर पूछने लगे कि जब उन्हें पतंग उड़ानी ही नहीं आती थी तो उन्होंने इतनी पतंगें कैसे काट दीं, और कौन सा विशेष माजा (डोर पर लगाया जाने वाला पदार्थ) इस्तेमाल किया। जब लोगों ने उनकी डोर देखी तो वह बिल्कुल सामान्य और सिंपल थी, जिससे सब दंग रह गए। यह घटना इस साधना की अद्भुत शक्ति का प्रत्यक्ष उदाहरण मानी जाती है।

लूना चमारी क्या-क्या कार्य कर सकती है

यह साधना जादू से भरी हुई मानी जाती है। इसकी प्रमुख शक्तियां इस प्रकार बताई गई हैं:


यह किसी भी चीज को नई पहचान दे सकती है और किसी का भी रूप बदलकर उसे अपने वश में कर सकती है।

यह जानवरों की भाषा तक समझने में सक्षम होती है।

यह वशीकरण करती है — किसी को सिर से पांव तक बांध सकती है, जड़ से शत्रु को समाप्त कर सकती है।

साधक जो भी इच्छा इसे बताकर मंत्र जाप करता है, यह उसे पूरा करने का प्रयास करती है।

यह साधक की सेवा एक दासी की तरह करती है, परंतु शर्त यह है कि गुरु द्वारा सच्चे शिष्य को यह साधना आगे सौंपी जाए, तभी यह उसकी सेवा करती है।

यह शक्ति का ट्रांसफर भी करती है — गुरु के माध्यम से यह शक्ति सिर से पांव तक स्थानांतरित की जा सकती है।

यह स्तंभन करने में सक्षम है — गति को रोक सकती है, बुद्धि को खराब या सीधी कर सकती है, माया जाल फैला सकती है।

जो वीर सिद्ध नहीं हो रहा, जो शक्ति सिद्ध नहीं हो रही, उसे भी यह सिद्ध करवा सकती है।

 

सौम्य और तामसी विधि

लूना चमारी साधना की दो विधियां बताई गई हैं — सौम्य और तामसी। सौम्य विधि इस चर्चा में विस्तार से बताई गई है, जबकि तामसी विधि केवल उन्हीं को बताई जाती है जिन्हें विधिवत दीक्षा दी जाती है — गुरु मंत्र, आसन मंत्र और किलन मंत्र देकर।

तामसी विधि थोड़ी तेज और तीव्र गति से कार्य करती है — मानो गोली की तरह। यदि कोई साधक लूना चमारी को पूर्ण रूप से सिद्ध कर लेता है, तो वह तंत्र विद्या में अत्यंत निपुण हो जाता है। उसकी तंत्र में गति इतनी खुल जाती है कि वह किसी का भी तंत्र बांध सकता है, खोल सकता है, और तंत्र उसके इशारों पर चलने लगता है। कामरूप देश की लूना चमारी को तंत्र विद्या में सबसे उच्च स्तर की साधना माना गया है।

प्राचीन ग्रंथों और अनुभवों में उल्लेख

इस साधना की प्राचीनता का प्रमाण देते हुए बताया गया कि पद्मावत ग्रंथ में लूना चमारी और तंत्र के संबंध की जानकारी मिलती है। इसमें उल्लेख है कि प्राचीन समय में लोग इस शाबर मंत्र और शक्ति से बड़े-बड़े कार्य सिद्ध करवाते थे।

एक अंग्रेज लेखक ने भी अपनी पुस्तक में इसका जिक्र किया था। उसने लिखा कि वह हिमाचल की ओर एक स्थान पर गया था, जहां बहुत सारे बिच्छू निकल आए और उनमें से एक-दो लोगों को डंक मार दिया। वहां उपस्थित एक साधक ने लूना चमारी का मंत्र पढ़कर उसे बांध दिया, और मात्र पांच मिनट में ही दर्द समाप्त हो गया, जबकि सामान्यतः बिच्छू के डंक का दर्द कई घंटों तक बना रहता है। इस चमत्कार को देखकर उस अंग्रेज ने इसका उल्लेख अपनी पुस्तक में किया।

चंडीगढ़ का व्यक्तिगत अनुभव

सागरनाथ जी ने अपना एक व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किया। एक बार चंडीगढ़ के सेक्टर 32 (बत्ती सेक्टर) की बात है, जहां एक ऑफिस के बाहर एक व्यक्ति आया जो दावा कर रहा था कि वह किसी के भी बारे में कुछ भी बता सकता है, भूत-भविष्य बता सकता है, और उसने वहां भीड़ इकट्ठा कर ली थी।

उस समय सागरनाथ जी ने लूना चमारी का मंत्र पढ़कर उस व्यक्ति को बांध दिया। इसका असर यह हुआ कि वह व्यक्ति स्वयं उनके पीछे पड़ गया और गिड़गिड़ाने लगा कि उसे खोल दिया जाए। वह उस समय मछली की तरह तड़पने लगा था। इस अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि यह साधना तुरंत प्रभाव दिखाती है और किसी की भी शक्ति को बांधने में सक्षम है।

साधना का मंत्र

चर्चा में मंत्र इस प्रकार बताया गया (जैसा वीडियो में उच्चारित किया गया):


घटा में सरस्वती, पंजा गुरु उस्ताद पीर का, रवे मान पे यकीन, करूं देश की चौमुखिया देवी, उसने बीजी फुलवाड़ी चुगली, लूना चमारी हमारी बुलाई ना आवे, ता हनुमान दे पोले खावे, आवा ता त ये छे घर वाला सिरदास साईं।

 

यह मंत्र वीडियो में स्पीड (तेज गति) से पढ़ा गया है, जैसा साधना में इसे पढ़ने का नियम बताया गया है।

साधना विधि और भोग सामग्री

साधना विधि इस प्रकार बताई गई:


प्रतिदिन कम से कम 10 माला का जाप आवश्यक है।

यह साधना 41 दिन की न्यूनतम अवधि तक की जाती है।

भोग में दो लड्डू, एक मीठा पान, दो लौंग, दो इलायची और सात प्रकार की मिठाई अर्पित करनी चाहिए।

इसमें गुलाब का इत्र विशेष रूप से पसंद किया जाता है। आधा इत्र दीये में डालना है (चाहे देसी घी का दीया हो या सरसों के तेल का), और शेष आधा स्वयं पर तथा माला पर स्प्रे करना है।

साधना करते समय मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।

साधना घर पर ही करनी चाहिए, बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है।

माला रुद्राक्ष की प्रयोग की जाती है।

 

यह साधना साधक को शांत रखती है और क्रोध में नहीं लाती, जबकि सामान्यतः कई साधनाओं के अभ्यास से क्रोध बढ़ने की संभावना रहती है।

प्रयोग और परिणाम

बताया गया कि जब भी इस साधना का उपयोग करना हो, तो सात रंग की मिठाई तथा सारी बताई गई सामग्री लेकर अपना कार्य मंत्र के माध्यम से बोल देना चाहिए और उसे एकांत (उजाड़) स्थान पर रख देना चाहिए। कार्य चाहे छोटा हो या बड़ा, यह एक सप्ताह के भीतर उसे पूर्ण कर देती है।

यह साधना विशेष रूप से उन साधकों के लिए उपयुक्त बताई गई है जो तंत्र विद्या में आगे बढ़ना चाहते हैं, भूत-प्रेत उतारने का कार्य करना चाहते हैं, या तंत्र के माध्यम से अपनी आजीविका चलाना चाहते हैं।

यह भी बताया गया कि यह साधना इतनी प्रबल है कि यदि किसी पर वशीकरण किया जाए और वह व्यक्ति मर भी जाए, तो भी उसकी आत्मा साधक के पास आती रहती है। अर्थात जो कार्य एक बार इसे सौंप दिया जाए, वह मृत्युपर्यंत तक चलता रहता है, जब तक व्यक्ति का स्वयं अंत नहीं हो जाता।

एक अन्य महत्वपूर्ण बात यह भी बताई गई कि यदि किसी साधक ने लूना चमारी को एक बार सिद्ध कर लिया है, तो जिन मंत्रों में लूना चमारी की आन (शक्ति) दी जाती है — जो कि तंत्र में लगभग 90% मंत्रों में होती है — उन्हें अलग से सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं रहती, वे स्वतः ही कार्य करने लगते हैं। इतनी शक्ति इस साधना में समाहित मानी जाती है।

सावधानी: बिना गुरु के न करें यह साधना

चर्चा के अंत में एक अत्यंत महत्वपूर्ण चेतावनी दी गई कि इस साधना से बिना गुरु के, बिना दीक्षा लिए और बिना विधिवत सिद्धि ट्रांसफर के छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। इसका कारण यह है कि गुरु मंत्र, गुरु का दिया रक्षा मंत्र और गुरु का दिया आसन मंत्र — इन तीनों के बिना इस साधना को छूना खतरनाक हो सकता है।

इसकी तुलना 33,000 वोल्ट की बिजली की तार से की गई — यदि बिना सुरक्षा के इसे पकड़ा जाए, तो साधक स्वयं ही जल सकता है, और इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी स्वयं साधक की होगी। जैसे बिना डॉक्टर बने कोई स्वयं का ऑपरेशन करने की कोशिश करे तो हानि निश्चित है, वैसे ही बिना गुरु के इस साधना में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है।

इस मंत्र और साधना को सार्वजनिक करने का उद्देश्य यह बताया गया कि ये प्राचीन विद्याएं लुप्त होती जा रही हैं, और लोगों को इनकी जानकारी रहनी चाहिए। जिनके पास पहले से गुरु हैं, वे अपने गुरु से इसे सिद्ध करवा सकते हैं।

निष्कर्ष

लूना चमारी साधना नाथ संप्रदाय की एक अत्यंत प्राचीन, शक्तिशाली और रहस्यमई विद्या है, जो हनुमान जी द्वारा सिद्ध कामरूप देश की मानी जाती है। इस चर्चा में इसके विभिन्न प्रकारों — राजस्थान, पंजाब की सुल्तानपुर व अमृतसर, और सबसे शक्तिशाली कामरूप वाली लूना चमारी — के बारे में जानकारी दी गई।

यह साधना मुख्य रूप से शाबर मंत्रों को जागृत करने, वशीकरण करने, शक्ति ट्रांसफर करने और तंत्र विद्या में साधक की गति को बढ़ाने का कार्य करती है। इसके प्रमाण प्राचीन ग्रंथ पद्मावत तथा एक अंग्रेज लेखक की पुस्तक में भी मिलते हैं। साथ ही, वक्ताओं ने अपने व्यक्तिगत अनुभव — पतंग की घटना और चंडीगढ़ की घटना — के माध्यम से इसकी वास्तविक शक्ति को भी सिद्ध करने का प्रयास किया।

साथ ही यह भी स्पष्ट रूप से बताया गया कि यह साधना अत्यंत प्रबल और गंभीर है, इसलिए इसे कभी भी बिना गुरु की दीक्षा और मार्गदर्शन के नहीं करना चाहिए। यह विद्या धीरे-धीरे लुप्त हो रही है, और इसे संरक्षित रखने तथा सही परंपरा से आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

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