बजरंगबली का शावर मंत्र: शत्रु नाश और तांत्रिक बंधन का अमोघ कवच
गुरु सागरनाथ के व्यक्तिगत अनुभव से
परिचय
mythologynath.com में आपका एक बार फिर से हार्दिक स्वागत है। मैं गुरु सागरनाथ आज आपके लिए एक अमूल्य बजरंगबली का शावर मंत्र लेकर आया हूं। यह ऐसा मंत्र है जिसका शायद ही किसी ने प्रयोग किया हो, लेकिन हमें मालूम है क्योंकि हमने स्वयं यह प्रयोग किया है और यह जानते हैं कि यह कैसे काम करता है।
यह इतना अमोघ कवच है कि दुश्मन के हर वार को जीरो कर देगा। बड़ी-बड़ी चुड़ैलों को जड़ से यानी पूरी तरह खात्मा कर देगा, काम तमाम कर देगा। इसके अलावा अगर किसी तांत्रिक को जड़ से बांधना है, तो यह मंत्र वह कार्य भी करेगा। श्मशान खेलना हो, मरघट या कब्रिस्तान से जुड़ा कोई कार्य करना हो — यह मंत्र वह भी संपन्न करेगा। यह इतना पावरफुल मंत्र है।
सिद्धि का व्यक्तिगत अनुभव
जब मैंने इस मंत्र को सिद्ध किया था, तो मुझे इसे सिद्ध करने में अधिकतम दो हफ्ते लगे थे।
पहले हफ्ते में मेरे अग्नि कुंड के साथ एक चमत्कारिक घटना घटी। वह कुंड टाइल जितना मोटा था, लोहे का नहीं बल्कि टाइल से बना हुआ कुंड था। पहले अनुष्ठान के दौरान वह कुंड फट गया, कड़क होकर टूट गया। इसके बाद जब दूसरा अनुष्ठान हुआ, तब भी यही सेम प्रोसेस दोहराई गई — मंत्र की शक्ति इतनी प्रबल थी।
सिद्धि की विधि
इस मंत्र को सिद्ध करने के लिए कोई लंबा-चौड़ा विधि-विधान नहीं है।
आवश्यक सामग्री और व्यवस्था
1. *कुंड*: जहां साधना सिद्ध करनी है, वहां बीच में अग्नि कुंड लगाया जाता है।
2. *पानी के प्याले*: कुंड के चारों तरफ पानी रखना है — उन्हीं प्यालों में जिनमें चिड़िया पानी पीती है।
3. *सुबह का उपयोग*: सुबह के समय उस पानी को पिया भी जा सकता है, और उससे स्नान भी किया जा सकता है। इससे आपकी आभा (ओरा) निश्चित रूप से बढ़ जाती है।
मूल मंत्र: वीर बजरंगी मंत्र
यह मंत्र हनुमान जी का वीर बजरंगी मंत्र है — यानी बजरंग बली के पूरे कारागार (शक्ति) वाला मंत्र। मंत्र इस प्रकार है:
० हनुमान हटीला***
***** मेरे गुरु की दुहाई।
यह मंत्र अपने-आप में कारगार (सिद्ध) है।
मंत्र में अर्पित भोग
इस मंत्र में हनुमान जी को निम्नलिखित भोग अर्पित किए जाते हैं:
– *लौंग*
– *सुपारी*
– *नारियल*
– *लड्डू*
इसके बाद हनुमान जी आपको इस मंत्र की पूर्ण शक्ति प्रदान कर देते हैं।
मंत्र सिद्ध होने के बाद प्राप्त शक्तियां
जब यह मंत्र सिद्ध हो जाता है, तो साधक जितने भी तांत्रिक हैं, उनकी विद्या को बांध सकता है, उन्हें बांध सकता है। कोई भी तांत्रिक साधक के ऊपर कोई बुरा कार्य नहीं कर सकता। तांत्रिक साधक के आगे हाथ जोड़कर खड़े हो जाएंगे — यह मंत्र इतना प्रभावी है।
इस मंत्र के माध्यम से यह भी सीखा जा सकता है कि हनुमान जी की चढ़ाई शत्रु पर कैसे की जाती है, और शत्रु को जड़ से कैसे समाप्त किया जाता है। यह विधि उन्हीं को बताई जाएगी जो इस मंत्र की दीक्षा लेंगे।
सवा पांच मन सुपारी का रहस्य
मंत्र में जो “सवा पांच मन का” भार बताया गया है, उसे समझने के लिए एक गणना दी गई है — एक मन में 40 किलो होता है। इस हिसाब से सवा पांच मन को 40 से गुणा करने पर उतना बड़ा भार आता है, जितना बजरंग बली की गदा का भार बताया गया है।
सामान्य रूप से जब हनुमान जी अपने बड़े रूप में आते हैं, तब उनकी भारीपन (हैवीनेस) का कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। यानी उनकी शक्ति की कोई सीमा नहीं, वह अनंत (इनफिनिटी) है। जैसे भोलेनाथ का न आदि है न अंत, वैसे ही हनुमान जी की शक्ति का भी कोई आदि-अंत नहीं है। वे शिव शक्ति हैं, रुद्र हैं।
नाथ पंथ में इस साधना का उद्देश्य
नाथ पंथ में इस मंत्र को सिद्ध किया जाता है, ताकि बुरी शक्तियों को रोका जा सके और उन्हें जड़ से नाश किया जा सके।
विभिन्न मठों की अपनी-अपनी विद्या
इस संसार में हर मठ अपनी-अपनी विद्या चलाते हैं —
– सनातन धर्म में अलग विद्या चलती है
– बौद्ध मठ में अलग विद्या चलती है
– इस्लाम मठ में अलग विद्या चलती है
– क्रिश्चियन मठ में अलग विद्या चलती है
इन सभी में अच्छी विद्या भी है और बुरी विद्या भी है।
कलयुग में विद्याओं की स्थिति
यह कलयुग है, और इसमें अच्छी विद्या कम पाई जाती है, जबकि बुरी विद्या लगभग सबके पास होती है — जो चमत्कार दिखाने और दावा करने के लिए इस्तेमाल की जाती है।
लेकिन अच्छी विद्याएं ये सब चीजें नहीं करतीं। वे सीधे जाकर अपना कार्य करती हैं — जो कार्य करना होता है, वह विद्या उसे सीधे साध लेती है, बिना किसी दिखावे के।
निष्कर्ष
इस वीडियो में गुरु सागरनाथ ने बजरंगबली के एक शक्तिशाली शावर मंत्र का परिचय दिया, जिसे उन्होंने स्वयं सिद्ध किया और जिसका प्रभाव अग्नि कुंड के फटने जैसी घटनाओं से प्रत्यक्ष अनुभव किया। यह मंत्र शत्रु नाश, चुड़ैलों के खात्मे और तांत्रिकों को बांधने की क्षमता रखता है।
सिद्धि की विधि सरल है — कुंड के चारों ओर पानी के प्याले रखना, सुबह उस पानी का सेवन या स्नान करना, और “हनुमान हटीला” से शुरू होने वाले वीर बजरंगी मंत्र का जाप करना, जिसमें हनुमान जी को लौंग, सुपारी, नारियल और लड्डू का भोग अर्पित किया जाता है।
गुरु सागरनाथ स्पष्ट करते हैं कि यह मंत्र शिव शक्ति और रुद्र स्वरूप हनुमान जी की अनंत शक्ति का प्रतीक है, जिसे नाथ पंथ में विशेष रूप से बुरी शक्तियों के नाश के लिए सिद्ध किया जाता है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कलयुग में अच्छी विद्या दुर्लभ है, जबकि बुरी विद्या चमत्कार दिखाने के लिए प्रयोग होती है — जबकि सच्ची विद्या बिना दिखावे के सीधे अपना कार्य सिद्ध करती है।
मंत्र की पूर्ण विधि और शत्रु पर चढ़ाई करने की प्रक्रिया केवल दीक्षा लेने वाले साधकों को ही बताई जाएगी।
राम राम, जय माता की।
