Kaal Bhairav Satta Sadhna Kale ilam Ki
काल भैरव सट्टा साधना: कर्जे से मुक्ति और धन प्राप्ति का तांत्रिक मार्ग
mythologynath.com पर आपका स्वागत है। आज का यह लेख उन सभी लोगों के लिए है जो पैसों की तंगी, भारी कर्जे, बेरोजगारी या अपने परिवार के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इस लेख में सागरनाथ जी के अनुभव और मार्गदर्शन के आधार पर काल भैरव सट्टा साधना के बारे में विस्तार से बताया गया है — उसकी विधि, सामग्री, मंत्र, व्यक्तिगत अनुभव और जरूरी सावधानियां। यह सारी जानकारी पूरी तरह से प्रैक्टिकल अनुभव पर आधारित है।
परिचय: क्यों जरूरी है यह साधना?
आज के समय में बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके ऊपर लाखों-करोड़ों का कर्जा है। किसी को बच्चे की पढ़ाई के लिए पैसा नहीं है, किसी को बेटी की शादी के लिए पैसों का इंतजाम नहीं हो पा रहा, कोई अपना कारोबार शुरू करना चाहता है लेकिन पूंजी नहीं है। ऐसे लोग हताश और परेशान होकर सोचते हैं कि अब किस ओर जाएं, क्या करें।
इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सागरनाथ जी ने काल भैरव सट्टा साधना के बारे में जानकारी साझा की है। यह कोई काल्पनिक या सुनी-सुनाई बात नहीं, बल्कि उनका खुद का अनुभव है।
काल भैरव सट्टा साधना क्या है?
काल भैरव सट्टा साधना एक तांत्रिक विद्या है जिसे तामसी रूप में सिद्ध किया जाता है। यह काल भैरव की साधना है और यह बहु-उद्देशीय (multi-purpose) होती है। इसके मुख्य फायदे इस प्रकार बताए गए हैं:
1. मनोकामना पूर्ण करना— आपकी जो भी मनोकामना हो, यह साधना उसे पूरा करती है।
2. सट्टे का नंबर देना — जो लोग सट्टे से धन कमाना चाहते हैं, उन्हें सपने में नंबर दिखाया जाता है।
3. काम में आ रही रुकावटें दूर करना— अगर किसी के व्यवसाय या जीवन में कोई अड़चन है तो यह साधना उसे भी हटाती है।
4. शत्रु बाधा से मुक्ति— दुश्मनों की बाधा को दूर करने में भी यह साधना कारगर मानी जाती है।
5. स्थायी धन की प्राप्ति — यह साधना केवल एक बार के लिए नहीं बल्कि स्थायी धन दिलाने में सहायक है।
सागरनाथ जी के अनुसार, यह साधना साधक की अपनी गति के साथ चलती है और उसी के अनुसार फल देती है।
साधना की सामग्री
इस साधना को करने से पहले निम्नलिखित सामग्री तैयार रखनी होती है:
- दही
- बड़ा (बड़े का प्रसाद)
- मदिरा (थोड़ी सी — एक छोटी बोतल पर्याप्त है, जिसे पाई हाथ भी कहते हैं
- कलेजी (बकरे की)
- दो मोटी बूंदी के लड्ड
- हवन सामग्री (सामान्य हवन जैसी)
- रुद्राक्ष की माला (जाप के लिए)
- दो नींबू (हवन के दौरान आहुति देने के लिए — इन्हें काटना नहीं बल्कि सीधे हवन कुंड में डालना है)
- काले कंबल का आसन
साधना की विधि
समय और स्थान
यह साधना रात के 12 बजे से लेकर 1-2 बजे के बीच करनी है। एक अलग कमरे में करें जहां कोई आपको उस समय परेशान न करे।
दिशा
साधना के समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना है।
किस दिन से शुरू करें?
यह साधना कृष्ण पक्ष में और शनिवार से शुरू करनी चाहिए। महत्वपूर्ण बात यह है कि साधना का सातवां या ग्यारहवां दिन अमावस्या का होना चाहिए। इसलिए पहले पंचांग देखकर तिथि तय करें।
कितने दिन करें?
यह साधना 7 दिन या 11 दिन तक करनी है। दोनों में से कोई एक चुनें, लेकिन जो भी चुनें उसे लगातार और पूरी विधि के साथ करें। बीच में छोड़ना नहीं है।
रोज की विधि
1. रात 12 बजे काले कंबल पर पूर्व दिशा में मुख करके बैठें।
2. हवन कुंड में हवन प्रज्वलित करें और हवन सामग्री से आहुति दें।
3. रुद्राक्ष की माला से मंत्र का 108 बार (एक माला) जाप करें।
4. जाप पूरा होने पर दोनों नींबू हवन कुंड में डाल दें (काटें नहीं)।
5. जोत लगाएं और शब्द (मंत्र) को पढ़ें।
भोग
रोज सुबह जो भोग लगाएं (कलेजी, मदिरा, लड्डू) — उसे काली माता के मंदिर में या काल भैरव के मंदिर में चढ़ाएं। अगर आपके आसपास ऐसा मंदिर नहीं है तो किसी पीपल के पेड़ के नीचे रख सकते हैं।
मंत्र (शब्द)
सागरनाथ जी ने जो शब्द/मंत्र बताया, वह इस प्रकार है:
सिद्ध शाबर मंत्र:
ॐ काला भैरू, कपिला केश। काना कुंडल भगवा वेष। तीर पतर लियो हाथ, चौसठ जोगनिया खेले पास। आस माई, पास माई। पास माई सीस माई। सामने गादी बैठे राजा, पीडो बैठे प्राजा मोहे। राजा को बनाऊ कुकडा। प्रजा बनाऊ गुलाम। शब्द सांचा, पींड कांचा । गुरु का बचन जुग जुग सांचा
सागरनाथ जी बताते हैं कि इस मंत्र की हर एक पंक्ति का गहरा अर्थ है। इसमें जोगनियां चलती हैं। इस शब्द को सुनते ही अंदर से सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
यह मंत्र उन्हें कैसे मिला? सागरनाथ जी बताते हैं कि उन्होंने भोले शंकर से प्रार्थना की थी कि कोई ऐसी साधना मिले जो आगे चलकर पैसों के मामले में काम आए। इसके तीन-चार दिन बाद सुबह स्वप्न में यह मंत्र उन्हें दिखाया गया। यह मंत्र पहले से उनके पास गुरु की दी हुई किताब में लिखा था, लेकिन उन्होंने कभी यूज नहीं किया था। जगत गुरु के संकेत पर उन्होंने इसे उठाया और काम में लाए।
सट्टे का नंबर कैसे मिलेगा?
7 या 11 दिन की साधना पूरी होने के बाद, आखिरी दिन:
1. दोबारा अपने आसन पर बैठें।
2. जोत लगाएं और मंत्र पढ़ना शुरू करें।
3. काल भैरव जी से यह विनती करें: “मेरे को सट्टे का नंबर सपने में देना है।”
4. जो सट्टा आपके क्षेत्र में चलता है — जैसे फरीदाबाद, दिल्ली, या जो भी — उसका नाम लेकर कहें कि “इस नाम में जो नंबर खुलने वाला है, मुझे साक्षात उसके दर्शन सपने में देना।”
इसके बाद वे आपको सपने में नंबर बता देते हैं।
सागरनाथ जी का व्यक्तिगत अनुभव
सागरनाथ जी ने यह साधना खुद की थी, करीब 11 दिन तक। रात 12 बजे बैठते थे और तकरीबन 2 बजे तक हवन करते थे।
जब उनके हाथ थोड़े तंग चल रहे थे तो उन्होंने काल भैरव से प्रार्थना की कि अब साधना सिद्ध हो गई है, तो कोई चमत्कार दिखाएं। सुबह 4 बजे गहरी नींद में एक सपना आया — एक ब्लैकबोर्ड पर लिखा था “फरीदाबाद”और ब्रैकेट में नंबर था “04”।
सुबह उठकर उन्होंने अपने एक मित्र को यह नंबर दिया और कहा कि इसे फरीदाबाद की शाम 6 बजे वाली गेम में लगाना है। पहले दो दिन नंबर नहीं आया, लेकिन तीसरे दिन वह नंबर खुल गया। उस दिन बारिश हो रही थी, घर पहुंचकर जब उन्होंने इंटरनेट पर रिजल्ट देखा तो 04 का नंबर खुला हुआ था।
उस पहली बार में सागरनाथ जी को करीब 45,000 रुपये मिले। उन्होंने बताया कि उन्होंने लालच नहीं किया — जितनी जरूरत थी उतना रखा, बाकी दान-पुण्य में लगाया और काल भैरव के मंदिर में मदिरा की पेटी चढ़ाई।
दूसरी बार जब जरूरत पड़ी तो उन्होंने दिल्ली की सुबह की गेम में नंबर लिया और करीब 25,000 रुपये मिले।
एक असली जिंदगी की कहानी: 30 लाख के कर्जे से मुक्ति
सागरनाथ जी ने बताया कि हरियाणा के एक जाट बंदे ने उनसे संपर्क किया। उसके ऊपर 30 लाख रुपये का कर्जा था और वो पूरी तरह हताश था। सागरनाथ जी ने उसे विधि विस्तार से समझाई और साथ में यह भी कहा कि लालच मत करना और विधि में कोई बदलाव मत करना।
उस बंदे ने 11 दिन की साधना की, रोज देसी मदिरा लेकर आता था और भोग लगाता था। रोज सपने में नंबर दिखते थे। सागरनाथ जी ने उसे बताया था कि 7 या 11वें दिन तक कोई नंबर मत लगाना।
उस बंदे ने पांच माला जाप किया और सुबह 4 बजे उठकर रात 12 बजे से साधना करता था। नतीजा यह निकला कि छह महीने के भीतर उसने 30 लाख का पूरा कर्जा उतार दिया। आज उसका घर अच्छे से चल रहा है।
साधना के नियम और सावधानियां
सागरनाथ जी ने कुछ बहुत जरूरी बातें कही हैं जिन्हें ध्यान में रखना अनिवार्य है:
1. विधि में कोई बदलाव न करें
जैसी विधि बताई गई है, ठीक वैसी ही करें। अपनी तरफ से कुछ जोड़ना या हटाना नहीं है। अगर विधि बदली तो सारी मेहनत बेकार जाएगी और कोई फायदा नहीं मिलेगा।
2. किसी प्राणी की जान न लें
एक व्यक्ति ने सागरनाथ जी से पूछा था कि क्या वो सफेद मुर्गे की बलि दे सकता है। सागरनाथ जी ने साफ मना किया। उन्होंने कहा कि काल भैरव को वासना (सुगंध/भोग) चाहिए, जीव की जान नहीं। उसके नाम का मुर्गा खुला छोड़ दें, मारें नहीं।
3. लालच न करें
जितनी जरूरत हो उतना ही लें। ज्यादा लालच करने पर काल भैरव नाराज हो सकते हैं। सागरनाथ जी ने खुद इसका उदाहरण दिया — उन्होंने हमेशा जरूरत के अनुसार लिया और बाकी दान किया।
4. गलत कामों में उपयोग न करें
जो लोग इस साधना से मिले धन को गलत कामों में लगाते हैं, उनका पहले से बना हुआ धन भी जीरो हो जाता है। ऐसे कई लोग सागरनाथ जी के पास वापस आए और उन्होंने उन्हें दोबारा साधना कराने से मना कर दिया।
5. महीने में दो-तीन बार से ज्यादा न करें
रोज-रोज इस साधना पर निर्भर नहीं रहना है। महीने में दो या तीन बार यह साधना करना पर्याप्त है। इससे जो मिले उसे बुद्धिमानी से अपने काम-धंधे में लगाएं। इस साधना का उद्देश्य जिंदगीभर के लिए कमाई का रास्ता खोलना नहीं बल्कि उन लोगों की मदद करना है जो किसी मुश्किल में फंसे हैं।
6. बिना दीक्षा के न करें
सागरनाथ जी ने स्पष्ट कहा कि बिना गुरु की देखरेख या दीक्षा के यह साधना न करें। 99% लोग बिना दीक्षा के यह साधना नहीं कर सकते। रात 12 से 2 बजे के बीच इसे करते समय अगर काली माता का साया सामने आ जाए तो कोई भी डर जाएगा और नुकसान हो सकता है जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी। इसलिए सोच-समझकर और मार्गदर्शन में ही यह साधना करें।
साधना का असली उद्देश्य
सागरनाथ जी का कहना है कि यह साधना उन लोगों के लिए है जो पैसों के चुंगल में फंसे हैं — जिन पर कर्जा है, जिन्हें बच्चे की पढ़ाई या शादी के लिए पैसा चाहिए, जो कोई छोटा-मोटा धंधा शुरू करना चाहते हैं।
एक बार जब आपके पास थोड़ा धन आ जाए तो उसे सही जगह लगाएं। अपना कारोबार खोलें, अपना बिजनेस बढ़ाएं। इस साधना पर स्थायी रूप से निर्भर नहीं रहना है बल्कि इसे एक साधन की तरह उपयोग करके खुद की जिंदगी संवारनी है।
जैसे नौकरी में महीने भर काम करके एक बार तनख्वाह मिलती है — वैसे ही अगर इस साधना से महीने में एक-दो बार अच्छा धन मिल जाए तो बहुत है। सब्र रखना जरूरी है।
आश्रमों में इस साधना का उपयोग
सागरनाथ जी ने एक दिलचस्प बात यह भी बताई कि बहुत से आश्रम और साधु इसी तरह की साधनाओं के जरिए अपने आश्रम का खर्चा चलाते हैं। जब गुरु शिष्य को आश्रम खोलने की आज्ञा देता है तो धन का प्रबंध करने के लिए ऐसे ही रास्ते अपनाए जाते हैं। जो श्रद्धालु उनके पास आते हैं और नंबर मांगते हैं, उनसे जो चढ़ावा मिलता है उसमें से कुछ हिस्सा वे रख लेते हैं और बाकी उन्हें दे देते हैं।
निष्कर्ष
काल भैरव सट्टा साधना एक तांत्रिक विद्या है जिसे सागरनाथ जी ने खुद अनुभव करके प्रमाणित किया है। यह साधना केवल सट्टे के लिए नहीं बल्कि मनोकामना पूर्ति, धन प्राप्ति, शत्रु बाधा और कार्य में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए भी उपयोगी है।
इसे करने के लिए सही समय, सही सामग्री, सही विधि और सबसे जरूरी — गुरु का मार्गदर्शन आवश्यक है। बिना दीक्षा और देखरेख के यह साधना करने की कोशिश न करें। लालच से दूर रहें, विधि में बदलाव न करें और जो मिले उसे सही कामों में लगाएं।
माता रानी और काल भैरव की कृपा से जो यह साधना सही नीयत और सही विधि से करेगा, उसके जीवन में धन का मार्ग अवश्य खुलेगा।
जय माता दी। जय काल भैरव।
नोट: यह लेख पूरी तरह से सागरनाथ जी के व्यक्तिगत अनुभव और विचारों पर आधारित है। किसी भी साधना को करने से पहले किसी योग्य गुरु का मार्गदर्शन अवश्य लें।
