Hanuman Veer Chlana Sabari Veer Ki Hazrat त्रिकालदर्शी शाबर मंत्र

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# हनुमान वीर चलाना: भूत, भविष्य और वर्तमान जानने की दैविक साधना

## परिचय

आज के युग में जब मनुष्य अपने जीवन की उलझनों से परेशान है, अपने भूत-भविष्य को जानने की इच्छा रखता है, तब वह कई बार ऐसी साधनाओं की ओर मुड़ जाता है जिनका नकारात्मक प्रभाव भी हो सकता है। कर्ण पिशाच साधना या तृतीय पक्ष (थर्ड पार्टी) से जुड़ी साधनाओं के नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए, अनेक साधक एक ऐसी दैविक साधना की तलाश में रहते हैं जो सुरक्षित हो, प्रभावशाली हो और जिसे गृहस्थ से लेकर सन्यासी तक कोई भी कर सके।

इस लेख में हम आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं — **हनुमान वीर चलाना**, जिसे **साबरी वीर की हजरात** भी कहा जाता है। यह एक ऐसी दैविक साधना है जिसके माध्यम से साधक स्वयं हनुमान जी की शक्ति को आह्वान कर, भूत, भविष्य और वर्तमान की जानकारी प्राप्त कर सकता है। यह साधना लुप्त होती जा रही परंपराओं में से एक है, और इसे पुनः जागृत करने का उद्देश्य यही है कि साधक एक उच्च स्तर तक पहुँचे और समाज का भला कर सके।

## साधना का नाम और स्वरूप

इस साधना का नाम है — **हनुमान वीर चलाना**, जिसे साबरी परंपरा में **साबरी वीर की हजरात** कहा जाता है।

“हजरात” शब्द का अर्थ होता है किसी शक्ति को हाजिर करना, यानी उसे अपने समक्ष उपस्थित कराना। परंपरागत रूप से हजरात में किसी बच्चे को बिठाकर उसके नाखून पर देखा जाता था या उससे प्रश्न पूछे जाते थे। किन्तु इस साधना की विशेषता यह है कि इसमें किसी बच्चे की आवश्यकता नहीं है। **साधक स्वयं अपने ऊपर इस साधना को लगाता है** और हनुमान जी स्वयं साधक को भूत, भविष्य और वर्तमान की जानकारी देते हैं।

यह साधना पूरी तरह दैविक है। इसमें कोई नकारात्मक शक्ति का आह्वान नहीं होता, बल्कि हनुमान जी की पावन शक्ति ही साधक का मार्गदर्शन करती है।

## साधना के प्रमुख लाभ

### 1. भूत भविष्य और वर्तमान का ज्ञान

इस साधना का सबसे प्रमुख लाभ यह है कि साधक को भूत भविष्य और वर्तमान की जानकारी मिलती है। जब कोई व्यक्ति साधक के पास अपनी समस्या लेकर आता है, तो साधक मंत्र जाप करते हुए ध्यान में बैठता है। उसी समय उसके मन में उस व्यक्ति की समस्या, उसका कारण और उसका समाधान — सब कुछ स्पष्ट होने लगता है।

यह जानकारी कानों से नहीं, बल्कि **मन के माध्यम से** आती है। साधक के मन में विचारों की एक धारा चलने लगती है जैसे — इस व्यक्ति के घर में यह समस्या है, यह इस कार्य के लिए आया है, इसकी रुकावट इस प्रकार दूर होगी। इस तरह साधक न केवल समस्या जान सकता है, बल्कि उसका हल भी बता सकता है।

### 2. पितृ दोष और कुल देवता संबंधी जानकारी

यह साधना पितृ दोष की पहचान करने में भी सहायक है। हनुमान जी साधक को बता देते हैं कि किसी के घर में पितृ दोष है या नहीं, उसे कैसे दूर किया जाए, क्या भोग देना है, क्या पूजा करनी है। इसके साथ ही यदि किसी का कुल देवता रुष्ट हो, किसी ने देवता को छोड़ रखा हो, या किसी ने घर पर चढ़ाई कर रखी हो — यह सब भी इस साधना के माध्यम से ज्ञात हो जाता है।

### 3. भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति

इस साधना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपयोग यह है कि जो व्यक्ति भूत-प्रेत की बाधा से पीड़ित हो, उसकी सहायता की जा सकती है। पानी पर मंत्र पढ़कर रोगी के ऊपर छींटे लगाने से जो आत्मा उसे कष्ट दे रही होती है, वह हाजिर हो जाती है और अपनी बात स्वयं कहने लगती है।

### 4. किसी भी शक्ति को हाजिर करना

इस साधना के माध्यम से साधक किसी भी शक्ति को — चाहे वह भूत हो, पिशाच हो — आह्वान करके उससे जानकारी प्राप्त कर सकता है। यह एक बहुमुखी साधना है जो अनेक कार्यों में सहायक है।

### 5. शारीरिक बल और सुरक्षा

यह साधना पहलवानों और कुश्तीबाजों में भी विशेष रूप से प्रचलित रही है। कहा जाता है कि यदि साधक इसे सिद्ध कर ले, तो पचास-साठ व्यक्ति भी यदि उसे घेर लें तो वह उन सबको परास्त कर सकता है। इससे शारीरिक बल और आत्मरक्षा की क्षमता में वृद्धि होती है।

## साधना करते समय क्या अनुभव होता है?

जब हनुमान जी साधक की देह पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं, तो साधक को निम्नलिखित अनुभव हो सकते हैं:

**शरीर में भारीपन** महसूस होने लगता है।

**शरीर कंपन (वाइब्रेशन)** करने लगता है, जैसे अंदर एक विद्युत धारा बह रही हो।

बैठे-बैठे **क्रोध का भाव** आ सकता है।

**मन में विचारों की धारा** प्रवाहित होने लगती है जिसमें सामने बैठे व्यक्ति की समस्याएँ और उनके समाधान स्पष्ट होने लगते हैं।

हनुमान जी वायु रूप में, आत्मा रूप में साधक के पास हाजिर होते हैं। यह अनुभव अत्यंत दिव्य और अलौकिक होता है।

## साधना की विधि

### आवश्यक सामग्री

इस साधना के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है:

**दो लड्डू** (भोग के लिए)

**मीठा पान**

**मूंगे की माला** (जाप के लिए)

**तिल का दीपक**

**लाल रंग का आसन और वस्त्र** (यह अनिवार्य है)

### समय और दिन

साधना **मंगलवार** के दिन करनी चाहिए।

**शुक्ल पक्ष** का मंगलवार इसके लिए सर्वोत्तम माना गया है।

विशेष अवसरों जैसे **दीपावली, दशहरा, नवरात्रि और ग्रहणकाल** में इस साधना का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

### जाप की संख्या

एक दिन में **21 माला** का जाप करना है।

### व्रत

– व्रत रखना या न रखना साधक की इच्छा पर निर्भर है। यह अनिवार्य नहीं है।

### साधना की अवधि

अनुभवी साधक इसे **दो दिनों** में भी सिद्ध कर सकते हैं।

सामान्यतः **सात दिन** की साधना पर्याप्त मानी जाती है।

## साधना का मंत्र

यह हजरात का मंत्र साबरी परंपरा से आया है। मंत्र इस प्रकार है:

ॐ बाबा हनुमान शेर जवान ************ तमाशा।

यह मंत्र **हनुमान वीर चलाने** का मूल मंत्र है। इसे गुरुगद्दी के साथ चलाया जाता है। इस मंत्र को पढ़ते ही साधक को एक सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होने लगता है और हनुमान जी की उपस्थिति का आभास होता है।

## भूत-प्रेत बाधा निवारण की विधि

यदि कोई व्यक्ति भूत-प्रेत की बाधा से पीड़ित हो और साधक उसकी सहायता करना चाहे, तो निम्नलिखित विधि अपनाई जाती है:

**1.** साधक **लाल रंग के आसन** पर बैठे।

**2.** अपने सामने **पानी से भरा लोटा या कमण्डल** रखे।

**3.** जो व्यक्ति भूत-प्रेत बाधा से पीड़ित है, उसे **सामने बिठाएं**।

**4.** मंत्र जाप शुरू करें — **11 बार या 21 बार** मंत्र पढ़कर जल को हाथ में लें।

**5.** वह जल पीड़ित व्यक्ति पर **छींटा** लगाएं।

**6.** पीड़ित व्यक्ति **चीखने-चिल्लाने** लगे तो उसकी **सिर की चोटी** (बालों का मध्य भाग) पकड़ लें — चाहे स्त्री हो, बच्चा हो, वृद्ध हो या युवा।

**7.** मंत्र जाप जारी रखें जब तक वह आत्मा स्वयं न बता दे — **मैं कहाँ से आया हूँ, मुझे किसने भेजा है, मैं कैसे जाऊंगा।**

**8.** जब सारी जानकारी मिल जाए और कार्य पूर्ण हो जाए, तो **पिंड चढ़ाना** चाहिए।

**9.** पिंड को बाद में **जला दें** और उसकी राख को या तो

किसी **उजाड़ स्थान** पर फेंक दें,

**गंगा या किसी बहते जल** में प्रवाहित कर दें, या

**पीपल के वृक्ष के नीचे** रख दें।

इस विधि से पीड़ित व्यक्ति को भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति मिल जाती है।

## कौन कर सकता है यह साधना?

यह साधना **सन्यासी, ब्रह्मचारी और गृहस्थ** — तीनों के लिए उपयुक्त है। इसमें किसी विशेष दीक्षा की अनिवार्यता नहीं बताई गई है। बस साधक के पास थोड़ा समय और सच्ची श्रद्धा होनी चाहिए। यह साधना उन सभी लोगों के लिए वरदान है जो अपने जीवन में सच्चे मार्गदर्शन की तलाश में हैं।

## साधना का महत्व और संरक्षण

यह साधना उन दुर्लभ विद्याओं में से एक है जो धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं। इन्हें जन-जन तक पहुँचाने का उद्देश्य यही है कि ये दिव्य मंत्र और विद्याएँ लुप्त न हों, साधक उच्च स्तर पर पहुँचें और समाज की सेवा कर सकें।

जिस प्रकार गुरु-शिष्य परंपरा में ज्ञान आगे बढ़ता है, उसी प्रकार इस साधना को भी जागृत रखने की आवश्यकता है। हजरात का अर्थ ही है — किसी वीर को खड़ा करके उससे मनोभाव से बात करना। और हनुमान जी जैसी महाशक्ति से जब साधक संवाद करता है, तो वह अनुभव अद्वितीय होता है।

## निष्कर्ष

**हनुमान वीर चलाना** अर्थात **साबरी वीर की हजरात** एक अत्यंत प्रभावशाली, सुरक्षित और दैविक साधना है जो साधक को भूत, भविष्य और वर्तमान जानने की क्षमता प्रदान करती है। इस साधना के माध्यम से —

भूत-प्रेत बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

पितृ दोष और कुल देवता की जानकारी मिलती है।

जीवन की समस्याओं का समाधान ज्ञात होता है।

साधक अपने आसपास के लोगों का कल्याण कर सकता है।

इस साधना को करने के लिए **शुक्ल पक्ष के मंगलवार** का चुनाव करें। दीपावली, दशहरा, नवरात्रि या ग्रहण जैसे विशेष अवसरों पर इसका प्रभाव कई गुना हो जाता है। **21 माला** जाप करें, लाल वस्त्र और आसन का उपयोग करें, और मंत्र —

ॐ बाबा हनुमान शेर जवान ************* तमाशा

 को सच्ची श्रद्धा के साथ जपें।

यह साधना केवल दो से सात दिनों में सिद्ध हो सकती है। साधक को देर नहीं करनी चाहिए, विशेषकर जब नवरात्रि जैसे शुभ दिन चल रहे हों।

हनुमान जी की इस दैविक साधना को जीवन में अपनाएं, सच्चे मार्गदर्शन की दिशा में कदम बढ़ाएं और अपने साथ-साथ समाज का भी कल्याण करें।

**जय श्री हनुमान। जय माता दी।**

**नोट:** साधना की पूर्ण विधि और मंत्र Mythologynath.com पर उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि साधना में कोई चूक न हो।

 

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